जब सभा करते हुए फूट-फूट कर रो पड़ी जयाप्रदा, इन पर लगाया आरोप
उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियां पूरी जोरों पर है उम्मीदवार अपने अपने लोकसभा क्षेत्रों में लोगों को लुभाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश की सबसे ज्यादा कांटे की टक्कर वाली रामपुर की सीट में पहले के दोस्त और अब दुश्मन जयाप्रदा और आजम खान आमने सामने हैं। ऐसे में अब भारतीय जनता पार्टी से टिकट मिलने के बाद जयाप्रदा ने रामपुर के चुनावी मैदान में अपनी चुनावी रैली शुरू कर दी है। बुधवार को एक सभा के दौरान वह फूट-फूट कर रो पड़ीं और कुछ देर के लिए उन्होंने भाषण रोका और अपने आंसू पोंछकर दोबारा भाषण शुरू किया।
दरअसल अपना नामांकन दाखिल करने के बाद जयाप्रदा रामपुर के एक इलाके में सभा करने पहुंची क्योंकि वह रामपुर से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी हैं। इसलिए उन्होंने मंच से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान पर आरोप लगाने शुरू किए। कुछ समय पहले जब जयाप्रदा को भाजपा ने टिकट दिया था। उस समय आजम खान ने उन्हें नाचने वाला कलाकार बताया था। ऐसे में जयाप्रदा ने उन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्हें समाजवादी पार्टी की तरफ से रामपुर लाए थे तो क्या उन्हें तब यह नहीं पता था कि मैं एक अभिनेत्री हूं और मैं फिल्मों में काम करती हूं। अगर उन्हें यह बात पता थी तो आज मेरे ऊपर इस तरह की भद्दी बातें क्यों की जा रही हैं। यह कहते-कहते उनकी आंखों में आंसू छलक आए।
इस जनसभा के दौरान जयाप्रदा का दर्द निकल कर सामने आ गया। जयाप्रदा ने भाषण के दौरान कहा कि वह रामपुर का भी नहीं छोड़ना चाहती थीं बल्कि यहां के लोगों की सेवा करना चाहती थीं। मगर मेरे ऊपर हमला करवाया गया और मुझे यहां पर रहने तक के लिए होटल तक नहीं मिलता था। इसी कारण वह सक्रिय राजनीति से दूर हो गई थीं। जयाप्रदा के भाषण से ऐसा लग रहा था जैसे कई सालों बाद कोई बिछड़ा अपनों से मिल गया हो। जयाप्रदा को भावुक होता देख जनसभा में मौजूद लोगों ने जयाप्रदा को हौसला दिया और जया हम आपके साथ हैं कि नारे भी लगाए।
दरअसल 2004 में आजम खान जयाप्रदा को समाजवादी पार्टी की तरफ से रामपुर ले आए थे और तब जाकर समाजवादी पार्टी ने रामपुर की सीट जीती थी। इसके बाद 2009 में भी जयाप्रदा को दोबारा रामपुर से सांसद चुना गया। आजम खान और जयाप्रदा एक दूसरे के दुश्मन हैं। ऐसे में रामपुर लोकसभा सीट पर दोनों के बीच कांटे की टक्कर होनी तय है।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



